संघर्ष के दौर ने संभवतः नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय राजनीति की कंटीली-पथरीली सीढ़ियों पर आगे बढ़ना सिखा दिया. लक्ष्य भले ही सत्ता नहीं रहा हो, लेकिन कठिन से कठिन स्थितियों में समाज और राष्ट्र के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प उनके जीवन में देखने को मिलता है.

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